नाबालिग नीट छात्रा से जुड़े चर्चित प्रकरण की सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीआई की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए। सुनवाई में यह अहम मुद्दा सामने आया कि जब कथित घटना के समय पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम थी, तब उसके मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
शनिवार, 28 फरवरी को हुई सुनवाई करीब तीन घंटे से अधिक समय तक चली। सुबह लगभग 11:15 बजे शुरू हुई कार्यवाही दोपहर 3:45 बजे तक लगातार जारी रही। इस दौरान अदालत ने सीबीआई की ओर से उपस्थित जांच अधिकारी (आईओ) एसपी रैंक के अधिकारी श्रीवास्तव से सीधे तौर पर पूछा कि नाबालिग होने के बावजूद पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने इस संबंध में सीबीआई से लिखित जवाब भी तलब किया है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने एसआईटी और सीबीआई द्वारा प्रस्तुत सभी दस्तावेजों का गहन अवलोकन किया। जांच से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया तथा कई बिंदुओं पर सीबीआई से स्पष्टीकरण मांगा गया।
मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 2 मार्च को निर्धारित की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आगे की कार्रवाई अगली सुनवाई में प्रस्तुत तथ्यों और जवाब के आधार पर तय की जाएगी।
मामले से जुड़े पक्षकारों ने न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास जताते हुए कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि निष्पक्ष सुनवाई के बाद न्याय अवश्य मिलेगा। चूंकि मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने इस पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से इनकार किया है।